UPPCS Mains- 2018 answer writing practice || UPPCS मुख्य परीक्षा – 2018 उत्तर लेखन अभ्यास #17

UPPCS Mains- 2018 answer writing practice

Q) “BRICS has grown in influence in the first decade of its formation but is still far from achieving its initial goals”. Comment. (200 words)
“BRICS  का प्रभाव अपनी स्थापना के पहले दशक में  बढ़ा तो है लेकिन अपने शुरुआती लक्ष्यों को प्राप्त करने से अभी भी यह काफी दूर है”  टिप्पणी करें|

The initial goals of BRICS were:

  • To reform of global financial governance,
  • Democratization of the United Nations and global governance architecture.

Growth in its influence

  • BRICS challenged the current governance of Western financial institutions like the International Monetary Fund and the World Bank by establishing New Development Bank (NDB), BRICS Contingent Reserve Arrangement (CRA) and proposed BRICS Contingent Reserve Arrangement (CRA) as an alternative to SWIFT.
  • BRICS countries have developed a strong economic and political relationship with the African, Latin American and Asian countries.
  • An immediate benefit is that BRICS provides immense opportunities for networking among leaders, resolve bilateral issues and discuss geopolitics.

Gaps in achieving its initial goals

  • Reforming the global governance architecture has been shown no credible progress. China does not support India’s stand on expansion of UNSC and entry into NSG.
  • BRICS been able to speak with one voice about the most important global issues like terrorism or climate change
  • China’s dominance is a reality even as the grouping asserts the sovereign equality of all members. China-Russia proximity has been a continuing factor. Moreover, China not abiding by international laws (South China Sea issue) is an issue.
  • Increased hostility between India and China particularly failure to resolve bilateral issues like boundary settlement, trade deficit, CPEC etc has become a major issue.
  • No progress in setting BRICS credit rating agencyor BRICS cable.

Conclusion

Until the bloc does not resolve the pressing ideological and bilateral issues it has a long way to go if it is to establish itself as an alternative source of power worthy of challenging the US-dominated world order.


BRICS के शुरुआती लक्ष्य  थे :

  • वैश्विक वित्तीय प्रशासन मे सुधार लाना
  • संयुक्त राष्ट्र संघ और वैश्विक प्रशासन व्यवस्था का लोकतंत्रीकरण

 

प्रभाव में वृद्धि:-

  • ब्रिक्स ने पश्चिमी वित्तीय संस्थानों जैसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के वर्तमान प्रशासन व्यवस्था को चुनौती देकर न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना की और स्विफ्ट के विकल्प के रूप में  ब्रिक्स कंटिंजेंट रिज़र्व अरेंजमेंट की स्थापना का प्रस्ताव रखा है |
  • ब्रिक्स देशों ने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशियाई देशों के साथ मज़बूत आर्थिक और राजनीतिक सम्बन्ध विकसित किये हैं |
  • तात्कालिक लाभ के रूप में ब्रिक्स नेताओं के बीच आपसी मुलाकातों , द्विपक्षीय मुद्दों का हल निकलने और भूराजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए मंच उपलब्ध कराता है |

शुरुवाती लक्ष्यों को प्राप्त करने में कमियां:-

  • वैश्विक प्रशासनिक व्यवस्था के  सुधार में कोई विशेष प्रगति नहीं दिखती है | सुरक्षा परिषद् के विस्तार और परमाणु आपूर्ति समूह में प्रवेश के प्रश्न पर चीन भारत का पक्ष नहीं लेता है |
  • ब्रिक्स महत्त्वपूर्ण मुद्दों जैसे आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन पर एकजुट होकर अपनी बात रखने में सफल रहा है |
  • हालाँकि समूह सभी सदस्यों की सम्प्रभुता की बात करता है लेकिन चीन का प्रभुत्व भी एक यथार्थ है | चीन और रूस की बढ़ती नजदीकियां भी एक स्थायी मुद्दा है | साथ ही चीन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन न करना भी एक मुद्दा है (विशेष कर दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर )|
  • चीन और भारत के बीच बढ़ता टकराव, विशेषकर द्विपक्षीय मुद्दों जैसे सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन, सीपेक आदि को सुलझाने में असफलता, भी एक प्रमुख मुद्दा है |
  • ब्रिक्स की ऋण मूल्याङ्कन संस्था(क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ) और ब्रिक्स केबल पर कोई प्रगति नहीं हो रही है |

निष्कर्ष:-

जब तक यह समूह आपस के महत्त्वपूर्ण वैचारिक और द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझा नहीं लेता, तब तक अमेरिकी प्रभुत्व वाली विश्व व्यवस्था के विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने में इसे बहुत लम्बा रास्ता तय करना है |