UPPCS Mains- 2018 answer writing practice || UPPCS मुख्य परीक्षा – 2018 उत्तर लेखन अभ्यास #19

UPPCS Mains- 2018 answer writing practice

The rupee has been on a downward trajectory against the dollar. Analyze the causes and implications of weakening of the rupee for the Indian economy. (200 words)
हाल के समय में डॉलर की तुलना में रूपया अधोगामी प्रक्षेप पथ पर है | इसके कारणों का विश्लेषण करें और रुपये की दुर्बलता के भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभावों को समझाएं| (200 words)

The for causes for fall in rupee are:

  • Rise in crude prices – The price of Brent crude is on the rise due to increase hostility between US and Iran. As oil prices rise, India’s trade deficit — excess of imports over exports — will worsen, which can in turn impact the current account deficit.
  • A growing anticipation of interest rates rising in the US and consequent out flow of foreign funds
  • The rise in global trade tensions amidst the ongoing trade war is another factor.

Implications for Indian Economy

  • Exporters, especially software exporters, stand to benefit, as they get more rupees while converting dollar export earnings into Indian currency.
  • India is the highest recipient of remittance ($69 billion in 2017) in the world. The value of these remittances in bank accounts in India rises as the rupee depreciates against the dollar.
  • Importers will be hit as the cost of getting goods or equipment into India will increase. When the rupee weakens, importers, especially oil companies and other import-intensive companies, have to shell out more rupees to buy an equivalent amount of dollars.
  • A weak rupee is making overseas travel costlier this holiday season.
  • Students studying abroad too will see their costs rise.
  • Overall effect – A widening CAD has macroeconomic implications. Also, the rise in import costs as a result of a weak rupee can boost inflationary pressures.

Way Forward

In the long run India needs to strengthen its export sector to reduce the CAD.


रुपए में गिरावट के कारण:-

  • कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी:- ब्रेंट क्रूड की कीमतों में चढ़ाव  हाल में अमेरिका और ईरान के बीच में  बढ़ते हुए तनाव के कारण  है|  जैसे-जैसे तेल की कीमतें बढ़ती है,  भारत का व्यापार घाटा- अर्थात आयात एवं निर्यात के बीच का अंतर-  और अधिक बढ़ेगा,  जोकि चालू खाता घाटे को प्रभावित करता है|
  • अमेरिका में ब्याज दर के बढ़ने की प्रत्याशा जिसके कारण विदेशी फंड भारत से पैसा निर्गत कर रहे हैं
  • वर्तमान में जारी व्यापार युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक तनाव भी एक कारण है

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए परिणाम:

  • निर्यातक, विशेषकर सॉफ्टवेयर निर्यातक लाभान्वित होंगे क्योंकि उन्हें डॉलर निर्यात राजस्व को भारतीय रुपए में बदलने पर अधिक मुद्रा प्राप्त होगी
  • भारत विश्व में फैली हुई अपनी श्रम शक्ति से बहुत सा धन(   2017 में 69 बिलीयन डॉलर) प्राप्त करता है|  इस प्रेषित धन का मूल्य भारत में बढ़ेगा क्योंकि रुपए का अवमूल्यन हो रहा है|
  • आयातकों को हानि होगी क्यूंकि      भारत मैं   वस्तुओं और उपकरणों के आयात की  कीमतें बढ़ जाएँगी   | जब         रूपया दुर्बल होता है तो आयातकों, विशेषकर तेल कंपनियों एवं अन्य आयात निर्भर उद्योगों को उतने ही डॉलर के लिए ज्यादा रुपये का भुगतान करना होता है |
  • दुर्बल रुपये से छुट्टिओं में विदेश यात्रा महँगी हो जाएगी |
  • विदेश में पढ़ रहे छात्रों को भी हानि होगी |
  • समग्र प्रभाव :- बढ़ते हुए चालू खाते घाटे के समष्टि अर्थशास्त्रीय प्रभाव होंगे | रुपये की दुर्बलता के कारण आयात की कीमत बढ़ने से मुद्रास्फीति भी बढ़ेगी |

निष्कर्ष: दीर्घावधि में भारत को अपने निर्यात क्षेत्र को सबल बनाने की आवश्यकता है जिससे चालू खाते घाटे पर नियंत्रण  सके |