UPPCS Mains- 2018 answer writing practice || UPPCS मुख्य परीक्षा – 2018 उत्तर लेखन अभ्यास #20

UPPCS Mains- 2018 answer writing practice

Under nutrition and over nutrition are both cause of concern in India. Discuss (200 words)
भारत में अल्प पोषण और अति पोषण दोनों ही चिंता का कारण बने हुए हैं | चर्चा करें |(200 शब्द )

Under nutrition

India ranks 114th out of 132 countries in stunting among children aged less than five and 120th out of 130 countries in under-5 wasting, as per the Global Nutrition Report, 2016. The burden of vitamin and mineral deficiencies (‘hidden hunger’) is also considerable. Hidden hunger is a form of under nutrition that occurs when intake and absorption of vitamins and minerals (such as zinc, iodine, and iron) are too low to sustain good health and development.

The major causes of under nutrition are insufficient intake of food such as milk, pulses, and fruits and vegetables, which are rich sources of micronutrients and a steady decline in the food basket diversity, especially of traditional grains such as bajra and millet, which have high nutritional value. Women and children are the most vulnerable to micronutrient deficiencies. In women it reduces physical work capacity and causes fatigue while in children it impairs growth and cognitive development.

Over nutrition becoming emergency

  • As per the recent findings of the National Family Health Survey-4 (2015-16), the Body Mass Index (BMI) of 15.5% of urban women was found to be less than 18.5 kg/m2, whereas 31.3% of urban women were in the category of overweight or obese (BMI of or more than 25.0 kg/m2).
  • Around 15% of urban men were underweight, while 26.3% belonged to the category of overweight and obese.
  • The main causes are change in lifestyle choices, unhealthy diet, lack of physical activity, drug/alcohol abuse and lack of awareness about nutrition etc. The main consequences have been the rise in non-communicable diseases (diabetes, stroke), mental health issue, increase out of pocket expenditure on health and hindrance to in achieving of SDGs.

Conclusion

To ensure food and nutrition security, there is a growing need for a multisectoral approach. The policies and programmes of various ministries should be converged for better results. This will not only transform India’s agricultural practices, but also spread awareness about nutritious food among key target groups, including tribals, women and children.


अल्पपोषण

वैश्विक पोषण रिपोर्ट, 2016 के अनुसार भारत पांच वर्ष से काम आयु के बच्चों में कम ऊंचाई(स्टंटिंग)     के अनुसार 132 देशों में 114वें स्थान पर है और वहीँ पांच वर्ष से कम  उम्र के बच्चों में कम वजन होने की समस्या में भारत का स्थान 130 देशों में 120 वां है|  विटामिन और खनिज की कमी( छिपी हुई भूख)  भी उल्लेखनीय है|  छिपी हुई या प्रश्न भूख एक तरह का अल्प पोषण है जब विटामिन और खनिज( जैसे जिंक आयोडीन और लोहा)  की मात्रा खाने में  इतनी कम हो जिससे  बच्चे का उत्तम स्वास्थ्य और विकास ना हो सके|

अल्प पोषण के मुख्य कारण  दूध,  दाल,  फल और सब्जियां  जैसे भोज्य पदार्थ जोकि पोषक तत्वों के उत्तम प्रदाता हैं,  कि भोजन में कमी;  साथ ही भोजन में  विविधता का कम होना,  विशेषकर परंपरागत अनाज जैसे जो और बाजरा,  जिनमें पोषण उत्तम होता है,  कि  कमी|  इन पोषक तत्वों की कमी के सबसे अधिक शिकार बच्चे और महिलाएं होते हैं|  महिलाओं में यह शारीरिक कार्य करने की क्षमता को कम करता है और थकान बढ़ाता है जबकि बच्चों में यह  शारीरिक और मानसिक विकास को अवरुद्ध करता है|

 अति पोषण की समस्या

  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे- 4( 2015- 16) के अनुसार  5% शहरी महिलाओं काबॉडी मास इंडेक्स( बीएमआई)  18.5 किलोग्राम प्रति  वर्ग मीटर से कम पाया गया जबकि,  31.3% शहरी महिलाएं मोटापे की शिकार पाई गई( बीएमआई 25 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर से अधिक)
  • लगभग 15% शहरी पुरुष कम वजन के थे जबकि3% मोटापे के शिकार थे
  • इसके मुख्य कारण जीवनशैली में बदलाव,  बिगड़ा हुआ खान पान,  शारीरिक श्रम की कमी,   शराब एवं मादक द्रव्यों का सेवन और  पोषण के विषय में अनभिज्ञता आदि हैं|  इसके मुख्य प्रभाव गैर संक्रामक  रोगों( मधुमेह,   हृदयाघात) ,  मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव, स्वास्थ्य पर अपनी जेब से होने वाले खर्च में बढ़ोतरी और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में अवरोध आदी हो सकते हैं |

 निष्कर्ष

खाद्य और पोषण सुरक्षा को सुनिश्चित करने के,  आज बहु क्षेत्रीय उपागम की महती आवश्यकता है|  विभिन्न मंत्रालयों की नीतियां और कार्यक्रम में अभिसारिता होनी चाहिए,  ताकि बेहतर परिणाम मिल सके|  यह न केवल भारत की कृषि को रूपांतरित करेगा,    बल्कि  पोषक खाद्य हेतु लक्षित  समूहो( जनजातियों,  महिलाओं और बच्चों) के बीच  चेतना के प्रसार में भी मदद करेगा|