जीन एडिटिंग से संबंधित नैतिक चिंताएँ  #51

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प्रश्न :क्रिस्पर-कैस 9 क्या है? जीन एडिटिंग के किन-किन क्षेत्रो मे इसका अनुप्रयोग संभव है| इसके अनुप्रयोग मे कौन सी नैतिक चिंताए जन्म लेती है? 

हाल ही में एक चीनी शोधकर्त्ता ने दावा किया कि उसने इस महीने पैदा हुई दुनिया के पहले जेनेटिकली एडिटेड बच्चों (जुड़वाँ लड़कियों) को उत्पन्न करने में सफलता हासिल की। शोधकर्त्ता के अनुसार, उसने जुड़वाँ बच्चों के DNA को जीवन के महत्त्वपूर्ण लक्षणों को पुनर्संपादित करने में सक्षम, एक शक्तिशाली नए उपकरण के द्वारा परिवर्तित कर दिया है। हालाँकि, उसका यह दावा अभी भी सत्यापित नहीं है और इस दावे पर तमाम तरह से अनैतिक ठहराया जा रहा है। दरअसल, जीन पूल की विविधता के साथ किसी भी प्रकार के परिवर्तन के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।

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ग्राउंड हैंडलिंग गतिविधियों पर नज़र # 50

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प्रश्न:ग्राउंड हैंडलिंग क्या है? इससे भारतीय सुरक्षा को किस प्रकार खतरा है?इससे निपटने के लिए किए गए उपाय को समझाएं | 

संदर्भ:

संसद में प्रस्तुत की गई एक रिपोर्ट के आँकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में नागरिक उड्डयन ब्यूरो को सुरक्षा के लिहाज़ से संवेनशील 27 घटनाओं की सूचना मिली। अतः स्पष्ट है कि देश के हवाई अड्डों पर सुरक्षात्मक गतिविधियों में सेंध यानी निगरानी व्यवस्था की कमी के चलते घटनाएँ निरंतर बढ़ रही हैं। चाहे 9/11 की घटना के तार हों, काठमांडू से इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण, अमृतसर में लैंडिंग के दौरान हुई घटना अथवा प्रमुख हवाई अड्डों पर मुद्रा और सोने की तस्करी के मामले, इन सभी मामलों ने विमानन सुरक्षा पर सवाल खड़े किये हैं। उल्लेखनीय है कि भारत सहित दुनिया भर में विमानन सुरक्षा पर असर डालने वाली प्रमुख गतिविधियों में से ग्राउंड हैंडलिंग (GH) को एक कारण माना गया है। अब प्रश्न यह है कि ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएँ क्या हैं और इसे सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से एक प्रमुख बिंदु क्यों माना जा रहा है।

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अंडमान की सेंटिनली जनजाति # 49

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प्रश्न:भारतीय जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों का वर्णन करते हुए बताएं की वर्तमान में सेंटेनली जनजाति के समक्ष किस प्रकार की समस्याएं विद्यमान है| यह संरक्षित जनजाति और प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट (RPA)से कैसे संबन्धित है| समाज के बदलते परिदृश्य में सेंटेनली जनजाति को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है? 

हाल ही में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के नॉर्थ सेंटिनल नामक द्वीप पर एक अमेरिकी नागरिक की हत्या सुर्खियों का कारण रहा। उल्लेखनीय है कि यह हत्या उस क्षेत्र में हुई है जहाँ सेंटिनली जनजाति निवास करती है। कुछ विचारकों ने सेंटिनेलियों को दोषी ठहराने और दंडित करने की मांग की है तथा कुछ अन्य ने कहा है कि उन्हें आधुनिक समाज के रूप में एकीकृत किया जाए। किंतु इन दोनों ही परिस्थितियों का परिणाम केवल इन अद्वितीय लोगों की विलुप्ति ही हो सकती है।

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चाबहार बंदरगाह में निवेश पर छूट के मायने # 48

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प्रश्न : SWIFT से आप क्या समझते हैं? चाबहार बंदरगाह कहां पर स्थित है ?इसके बन जाने से कौन-कौन से देश लाभान्वित होंगे| भारत के संदर्भ में चाबहार बंदरगाह की क्या महत्ता को स्पष्ट करते हुए इसके समक्ष आने वाली आशंकाओं को भी बताएं |

अफगानिस्तान में गृहयुद्ध की समाप्ति के लिये मॉस्को में आयोजित महत्त्वपूर्ण वार्ता प्रारंभ होने से दो दिन पूर्व ही अमेरिकी सरकार ने ईरान के समुद्री बंदरगाह, चाबहार (Chabahar) में भारतीय निवेश पर अपनी मंज़ूरी देते हुए छूट की घोषणा की। कुछ विचारकों का मानना है कि यह सामुद्रिक बंदरगाह पूरी तरह से अमेरिका के अनुकूल है क्योंकि चीन की बजाय भारत, ईरानी बंदरगाह का विकास कर रहा है, जबकि कुछ अन्य विचारकों का यह भी मानना है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरानी बंदरगाह को असामान्य छूट देने के पीछे की मुख्य वज़ह भारत द्वारा ईरान में अपने निवेश को बचाने और अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया से जोड़ने वाली अपनी इस नई नीति को आक्रामक लॉबिंग के साथ प्रस्तुत करना था।

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BRI परियोजना और भारत की चिंता # 47

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प्रश्न : बेल्ट रोड इनीशिएटिव क्या है?इसके क्या उद्देश्य है? इसमें चीन की मंशा को समझाते हुए बताएं कि इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

हाल ही में पेरिस पीस फोरम में प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान चीन की बेल्ट और रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजना के संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के प्रमुखों ने अधिक समावेशी बहुपक्षवाद के मामले को उठाया और इसे वैश्वीकरण के खिलाफ मानते हुए कहा कि चीन बहुपक्षवाद के ज़रिये एक गैर-पश्चिमी और गैर-लोकतांत्रिक महाशक्ति के रूप में इस परियोजना को आगे बढ़ा रहा है। वास्तव में BRI परियोजना द्वारा चीन दुनिया को प्रभावित करने की महत्त्वाकांक्षा रखता है और यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो यह इसी तरह विस्तार करता रहेगा। उल्लेखनीय है कि चीन द्वारा विकसित इस परियोजना में शामिल देशों के व्यापार हेतु निर्धारित मानक ढाँचे की मुख्य भूमिका भी स्वयं चीन द्वारा निभाई जाती है और विवादों को सुलझाने हेतु किसी संगठन का न होना इसे और संदेहास्पस्द बनाता है तथा भारत भी इन समस्यायों से अप्रभावित नहीं है।

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मेक इट द इंडियन वे (Make it the Indian way) # 46

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प्रश्न : थ्री डी प्रिंटिंग क्या है?  यह कैसे कार्य करती है? आलोचनात्मक अध्ययन कर यह भी बताएं कि यह भारत की तकनीकी में एक अवसर के रूप में किस प्रकार अपनी भूमिका का निर्वहन करेगी ?

संदर्भ

हम सब एक ऐसे ऐतिहासिक युग में रह रहे हैं जहाँ विनिर्माण क्षेत्र में विघटनकारी प्रौद्योगिकियों द्वारा आमूलचूल परिवर्तन किया जा रहा है। ऐसी ही एक प्रौद्योगिकी “3D प्रिंटिंग” है जिसका उपयोग पश्चिमी देशों द्वारा पहले से ही किया जा रहा है। यदि भारत को भी अपने ‘मेक इन इंडिया’ के सपने को साकार करना है तो “3D प्रिंटिंग” का उपयोग ‘मेक इट द इंडियन वे’ के रूप में करना होगा।

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भारत पर प्रथम विश्वयुद्ध के प्रभाव # 45

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प्रश्न : प्रथम विश्व युद्ध के तात्कालिक एवं दीर्घकालिक कारणों का पता लगाएं  और यह भी समझाएं कि इसका भारत के लिए क्या महत्व था? इस युद्ध ने भारत को किस प्रकार प्रभावित किया?

बीते दिनों दुनिया के सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रथम विश्वयुद्ध की ख़बरें सुर्ख़ियों में बनी रहीं। दरअसल, इन सुर्ख़ियों की मुख्य वज़ह प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति के सौ वर्षों (नवंबर को) का पूरा होना था। इस अवसर पर पेरिस में आयोजित एक समारोह में विश्व के लगभग 70 देशों के नेता एकत्रित हुए जिसमें भारत की ओर से उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी शामिल हुए। हालाँकि, इस युद्ध में न तो विश्व के सभी देश शामिल थे और न ही सभी देशों का हित इस युद्ध में निहित था, लेकिन फिर भी इस युद्ध ने भारत सहित दुनिया के सभी देशों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया।

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तापमान एक अदृश्य जलवायु जोखिम (invisible climate risk) # 44

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प्रश्न : विश्व में जलवायु में बढ़ते तापमान से किस प्रकार की समस्या उत्पन्न होने की संभावनाएं ज्यादा है? इंडिया कुलिंग एक्शन प्लान क्या है एवं इसके क्या लक्ष्य है ? बढ़ते तापमान पर नियंत्रण करने के उपाय सुझाए |

जब हम जलवायु परिवर्तन की बात करते हैं, तो अक्सर इसमें पिघलने वाली बर्फ की चादरों और अत्यधिक सूखे की अवधियों को ही शामिल करते हैं। हालाँकि, इसका एक और पक्ष बढ़ता तापमान भी है। यह एक अदृश्य जलवायु जोखिम है जिससे विभिन्न समुदाय अभी तक अनजान हैं। दरअसल, बढ़ते तापमान की धीमी और क्रमिक प्रवृत्ति लोगों के जीवन, आजीविका और उत्पादकता को सीधे प्रभावित करती है। उल्लेखनीय है कि ज्यादातर संवेदशील लोग खुद को गर्मी से कैसे बचा सकते हैं, इसके बारे में उन्हें या तो सीमित जानकारी है या कोई जानकारी नहीं है। यहाँ तक कि राष्ट्रीय स्तर पर भारत कूलिंग एक्शन प्लान के माध्यम से राष्ट्रीय शीतलन रणनीति को लागू करने के सरकार के प्रयास को भी अपर्याप्त माना जा रहा है।

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रिक्त पद बनाम लंबित मामले (A Crippling Shortage) # 43

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प्रश्न:न्यायालय में जज की नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है ? हाल ही में न्यायालय ने पहले से लंबित पड़े मुकदमों के संबंध में घोर चिंता व्यक्त की है | उन संभावित कारणों की पहचान करें जिनके कारण न्यायालय की क्षमता प्रभावित हो रही है एवं उसके समाधान को भी खोजने का प्रयास करें |

सामान्य अध्ययन-II

संदर्भ

हाल ही के नवीनतम आँकड़ों के मुताबिक, देश में लगभग 3.3 करोड़ लंबित मामलों का बैकलॉग है जिसमें से लगभग 2.84 करोड़ मामले अधीनस्थ अदालतों में लंबित हैं। न्यायपालिका में मानव संसाधन की कमी लंबित मामलों की लापरवाही के लिये उत्तरदायी है। इन मामलों का स्वतः संज्ञान लेते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने देश की निचली अदालतों में रिक्तियों को भरने में की जाने वाली देरी के संबंध में राज्य सरकारों और विभिन्न उच्च न्यायालयों के प्रशासन की आलोचना की है।

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न्यायिक सक्रियता की ओर बढ़ते कदम  # 42

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प्रश्न : वर्तमान में न्यायपालिका द्वारा  सरकार के कार्य में हस्तक्षेप कर दिए गए अनेक निर्णयों को देने की प्रथा मे बारंबारता आ रही है|कुछ विचारक इसे न्यायिक सक्रियता  कहते हैं| इस संदर्भ में न्यायिक सक्रियता को परिभाषित करते हुए इस का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें |
    सामान्य अध्ययन – II

संदर्भ

हाल के कई निर्णयों से ऐसा माना जा रहा है कि सर्वोच्च न्यायालय कानून निर्माण करने में अति सक्रिय भूमिका निभा रहा है। न तो राज्य के तीनों अंगों के बीच शक्तियों का स्पष्ट पृथक्करण है और न ही कानून संरक्षित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राम जवाया बनाम पंजाब राज्य (1955) के मामले में, अदालत ने कहा था कि “हमारा संविधान राज्य के एक अंग या हिस्से की धारणा पर विचार नहीं करता है, जो अनिवार्य रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं।” इसका तात्पर्य है कि संविधान में राज्य के तीन अंगों (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) के बीच शक्तियों का स्पष्ट पृथक्करण होना चाहिये और एक अंग को दूसरे के क्षेत्र का अतिक्रमण नहीं करना चाहिये। यदि ऐसा होता है, तो संविधान के नाजुक संतुलन को हानि पहुँचेगी और अराजकता फैलेगी।

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