भारत को मिला चाबहार बंदरगाह का परिचालन अधिकार #70

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प्रश्न :चाबहार डील क्या है? "शाहिद बहिश्ती" चाबहार डील से किस प्रकार संबंधित है ?इसका भारत के लिए क्या महत्व है ?चाबहार डील से पाकिस्तान पर किस प्रकार के प्रभाव होंगे? समीक्षा करें ?

सामान्य अध्ययन : पश्न पत्र 2

संदर्भ

ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह पर कामकाज का नियंत्रण भारत को मिल गया है। चाबहार में 24 दिसंबर को ईरान-भारत और अफगानिस्तान के बीच हुई अधिकारी स्तर की त्रिपक्षीय बैठक में जल्द ही त्रिपक्षीय ट्रांजिट समझौते को भी लागू करने पर सहमति बनी। तीनों देश इसके लिये ट्रांजिट, सड़क, सीमा-शुल्क आदि मुद्दों पर तालमेल कर प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देने पर सहमत हुए।

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कंप्यूटर डेटा पर सरकार की निगरानी # 69

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प्रश्न : वर्तमान में ऑनलाइन गतिविधियों के बढ़ते प्रभाव  पर निगरानी रखने की अति आवश्यकता सरकार को महसूस हो रही है? ऐसे में  इनके निगरानी के संबंध में बने प्रावधानों को समझाते हुए बताएं कि, यह क्यों आवश्यक है? पिछले वर्ष श्रीकृष्ण समिति  की इस संदर्भ में क्या अनुशंसा है ?

सामान्य अध्ययन-III

हाल ही में गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2009 के नियम 4 के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 की धारा 69 की उपधारा (1) की शक्तियों का प्रयोग करते हुए सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों को किसी संदिग्ध कंप्यूटर में संग्रहीत सूचनाओं तथा डेटा और कॉल की निगरानी के लिये अधिकृत किया गया है।

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बैंकों की हालत सुधारने के लिये सरकार ने उठाया बड़ा कदम #68

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 प्रश्न : प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन क्या है? रिजर्व बैंक  इसके अंतर्गत कौन सी पहल का निष्पादन करता है? सरकार की 4R अवधारणा  से PCA किस प्रकार संबंधित है ? साथ ही सरकार की इंद्रधनुष 2.0 योजना को भी समझाएं 

चर्चा में क्यों?

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिये बैंक पुनर्पूंजीकरण परिव्यय (Bank Recapitalisation Outlay) को चालू वित्त वर्ष में 65 हज़ार करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1,06,000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव संसद में रखा। देश के विकास में सरकारी क्षेत्र के बैंकों की भूमिका के मद्देनज़र बैंकिंग सेक्टर को मज़बूत बनाने के लिये और अधिक पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे Prompt Corrective Action (PCA) से बाहर निकलने के लिये बेहतर प्रदर्शन करने वाले बैंकों को भी पर्याप्त पूंजी दी जाएगी।

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सरोगेसी (विनियमन) विधेयक-2016 #67

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प्रश्न : सरोगेसी क्या है ?अभी हाल ही में लोकसभा द्वारा सरोगेसी (विनियमन) विधेयक को पास किया गया है|इस विधेयक के अंतर्गत महत्वपूर्ण प्रावधान की चर्चा करते हुए बताएं कि भारत क्यों सरोगेसी के मामले में ह्ब होता जा रहा है|यह भी बताएं कि न्यायालय ने सरोगेसी के संदर्भ  में किस प्रकार के निर्णय दिये है ?

चर्चा में क्यों?

दिसंबर 2018 को लोकसभा ने सरोगेसी (विनियमन) विधेयक-2016 पारित कर दिया। इस विधेयक में देश में कॉमर्शियल उद्देश्यों से जुड़ी सरोगेसी (Surrogacy) पर रोक लगाने, सरोगेसी का दुरुपयोग रोकने के साथ ही निस्संतान दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति सुनिश्चित करने के प्रावधान किये गए हैं।

क्या है सरोगेसी?

सरोगेसी का हिंदी में सीधा-सीधा अर्थ है- किराये की कोख। प्रजनन विज्ञान की प्रगति ने उन दंपतियों तथा अन्य लोगों के लिये प्राकृतिक रूप से संतान-सुख प्राप्त करना संभव बना दिया है, जिनकी किन्हीं कारणों से अपनी संतान नहीं हो सकती। इसी से ‘सरोगेट मदर’ की अवधारणा जन्मी है। सरोगेसी सहायक प्रजनन की एक विधि है। गर्भावधि सरोगेसी यानी Gestational Surrogacy इसका अधिक सामान्य रूप है। इस विधि में सरोगेट संतान आनुवंशिक तौर पर पिता और सरोगेट मां से संबंधित होती है। दूसरी ओर, IVF में सरोगेट संतान पूर्ण रूप से सामाजिक रूप से मान्य अभिभावकों (Traditional Surrogacy) से जुड़ी होती है।

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जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन बनाम राष्ट्रपति शासन #66

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प्रश्न : एस.आर. बोम्मई मामला मे न्यायपालिका  द्वारा दिए गए निर्णय को संक्षिप्त में बताते हुए यह भी बताये की राज्यपाल शासन और राष्ट्रपति शासन के मध्य क्या अंतर है  ?जम्मू कश्मीर की रणवीर दंड संहिता से आप क्या समझते हैं | वर्णन करें |

19 दिसंबर को जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन की 6 माह की अवधि समाप्त होने बाद केंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने केंद्र सरकार से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की थी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा जारी अधिसूचना के बाद 20 दिसंबर की रात से राज्य की विधायिका शक्तियाँ संसद के अधिकार के तहत आ गई हैं। गौरतलब है कि J&K  राज्य में 22 साल बाद राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है।

पृष्ठभूमि

जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधायकों की खरीद-फरोख्त और सरकार के स्थायित्व का हवाला देते हुए 21 नवंबर को विधानसभा भंग कर दी थी। इससे पहले 18 जून को सरकार गिर जाने के बाद राज्य में राज्यपाल शासन लागू हुआ था।

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 गैस-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भारत के कदम #65

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि देश आने वाले कुछ वर्षों में गैस-आधारित अर्थव्यवस्था में बदल जाएगा। पहली नज़र में देखा जाए तो यह किसी ख्वाब के हकीकत में बदल जाने जैसा दिखाई देता है। ऐसा इसलिये कि गैस-आधारित अर्थव्यवस्था में ऊर्जा पर आने वाली लागत बहुत कम हो जाती है और यह इको-फ्रेंडली भी होती है।

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खाद्य पदार्थों के लगातार गिरते दाम चिंता का कारण #64

प्रश्न : मुद्रास्फीति  और अपस्फीति क्या है? यह मांग और आपूर्ति से किस प्रकार संबंधित है?पिछले 2 वर्षों में लगातार खाद्य पदार्थ की वस्तुओं की कीमत में कमी के बावजूद बाजार में मांग और आपूर्ति पक्ष असंतुलित नहीं हो पा रही है? अतः इससे उबरने के क्या उपाय संभव हो सकते हैं?

सितंबर 2016 से नवंबर 2018 तक इन 27 महीनों में देश में उपभोक्ता खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति की दर सामान्य मुद्रास्फीति की दर से लगातार कम बनी हुई है। बेशक महँगाई के मोर्चे पर सरकार के लिये यह राहत-भरी खबर है, लेकिन खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार गिरावट ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिये निस्संदेह चिंता का एक बड़ा कारण है।

गौरतलब है कि इन 27 महीनों में से 5 महीने ऐसे रहे जब आधिकारिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वार्षिक वृद्धि नकारात्मक रही। इसका अर्थ यह है कि हमें सब्जियों, दालों, चीनी या अंडे आदि के लिये एक साल पहले की तुलना में कम दाम चुकाने पड़ रहे हैं।

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रिज़र्व बैंक की स्वायत्तता पर सवाल #63

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प्रश्न : RBI अधिनियम 1934 कि धारा 7 के वो महत्वपूर्ण प्रावधान कौन से हैं | जिसकी वजह से आरबीआई गवर्नर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा| RBI के महत्वपूर्ण कार्य को समझाते हुए बताएं  कि भारतीय सरकार और भारतीय केंद्रीय बैंक के मध्य किस प्रकार के विवाद है एवं इसके निस्तारण में नए गवर्नर को कैसे सफलता प्राप्त हो सकेगी ?

रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने जब दिसंबर मे इस्तीफा दिया, तो एकबारगी सभी हैरान रह गए। अचानक आए इस इस्तीफे ने बाज़ार और सरकार में खलबली मचा दी थी। लेकिन इसके अगले ही दिन भारत सरकार ने आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव शक्तिकांत दास को तीन साल के लिये RBI का नया गवर्नर नियुक्त कर दिया, जबकि सामान्यतया ऐसी परिस्थिति में रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर को कुछ समय के लिये ज़िम्मेदारी दी जाती है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से रिज़र्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता के मसले को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई है। नए गवर्नर शक्तिकांत दास ने स्वायत्तता को ज़रूरी बताते हुए सरकार के साथ सहयोग करने की बात कही है।

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उदय योजना और उससे संबन्धित बिजली क्षेत्र की चुनौतियाँ #62

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प्रश्न: सरकार द्वारा उदय योजना का प्रारंभ करने के पीछे क्या मंशा  का उल्लेख करते हुए इस योजना की महत्वपूर्ण विशेषताओं को बताए| साथ ही इसके चुनौतियों का जिक्र करते हुए भविष्योन्मुखी उपाय भी सुझाए |

संदर्भ

बिजली क्षेत्र की अधिकांश समस्याएँ डिस्कॉम (वितरण कंपनियाँ) क्षेत्र के खराब निष्पादन से जुड़ी हुई हैं। इन्हीं समस्यायों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2015 में ‘उदय’ (उज्ज्वल डिस्‍कॉम एश्‍योरेंस योजना) योजना को लॉन्च किया गया था जो कि विचार की दृष्टि से एक अच्छी पहल थी। गुजरात जैसे राज्य में यह योजना अधिक सफल रही और इस योजना के कारण इस राज्य में बिजली क्षेत्र में काफी सकारात्मक परिवर्तन भी देखें गए। परिणामस्वरूप ‘उदय’ देश के अन्य हिस्सों के लिये एक मॉडल योजना बन गई हालाँकि, इस योजना ने इन वितरण कंपनियों को केवल अस्थायी राहत प्रदान की है तथा इस योजना से शेष राज्यों में उतने सकारात्मक परिणाम प्राप्त नहीं हुए हैं जितने उससे अपेक्षित थे। अब प्रश्न यह है कि उदय योजना क्या है और इससे जुड़ी ऐसी क्या विशेषताएँ हैं जिनका लाभ इसके अपेक्षित लाभार्थियों तक नहीं पहुँच पाया है?

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उर्जित पटेल का जाना…शक्तिकांत दास का आना #61

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प्रश्न : सरकार और आरबीआई के मध्य वह कौन से विवाद है जो केंद्रीय बैंक गवर्नर को इस्तीफा देने  की परिणति के रूप में सामने आया |गवर्नर के इस्तीफा देने की क्या यह पहली घटना है अथवा इसकी बारंबारता भूतकाल में भी हो चुकी है| इसको दूर करने के क्या उपाय संभव हो सकते हैं ? चर्चा करें |

पिछले कुछ समय से चल रही गहमागहमी तथा अटकलों को और बढ़ाते हुए रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने 10 दिसंबर को इस्तीफा दे दिया। इसके बाद तुरत-फुरत कदम उठाते हुए भारत सरकार ने आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव शक्तिकांत दास को तीन साल के लिये RBI का नया गवर्नर नियुक्त कर दिया।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से रिज़र्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता के मसले को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई थी। चर्चा यह थी कि भारत सरकार ने रिज़र्व बैंक की संरक्षित निधि में से 3.60 लाख करोड़ रुपए की मांग की थी, जिसका बैंक  ने विरोध किया था। रिज़र्व बैंक के गवर्नर के इस्तीफे का यह मुद्दा देखने में बेशक सामान्य प्रतीत होता हो, लेकिन वस्तुतः ऐसा है नहीं।

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