UPPCS Mains- 2018 answer writing practice || UPPCS मुख्य परीक्षा – 2018 उत्तर लेखन अभ्यास #28

UPPCS MAINS- 2018 ANSWER WRITING PRACTICE

What are the different non-conventional sources of energy? Do you think they have been adequately utilized in India? Critically examine. (200 words)
ऊर्जा के विभिन्न गैर पारंपरिक स्रोत क्या हैं? क्या आपको लगता है कि उनका भारत में पर्याप्त रूप से उपयोग किया जा रहा है? आलोचनात्मक परीक्षण करें। (200 शब्द)

Non-conventional sources of energy are those which have not been use that  frequently in the past unlike conventional sources like coal, oil etc. Different types of non-conventional sources of energy include solar power, wind energy, biogas, tidal energy, shale gas, coal bed methane, geothermal energy etc.
Despite Indian physiography being favorable towards non-conventional resources but the share of non-conventional sources to the total energy share is low. The major reasons being:

1. Lack of advanced technology which is required to exploit the energy source.
2. Lack of financial viability of the project with high initial capital cost.

3.Lack of financial viability of the project as the cost of electricity produced is higher than the traditional source.
4. Difficulty in synchronizing the electricity produced from non non-conventional resources with the main grid.
5. Delay in land acquisition process have also created hurdles as some of the
non-conventional sources like solar, wind power requires huge land area.

However, lately the government has shown the tremendous will in utilizing these resources due to environmental concerns and India’s commitment. This is exemplified by:

  • India’s INDC as per Paris climate deal. India has committed to generate 175 GW of energy via renewable resources.
  • India taking the lead in establishing the International Solar Alliance.
  • India collaboration with other countries establishing green energy corridor with the help of Germany.



    ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोत वे हैं जिनका उपयोग  पारंपरिक स्रोतों जैसे कि कोयला, तेल इत्यादि के विपरीत, पूर्व में बहुत काम  किया जाता रहा है। ऊर्जा के विभिन्न प्रकार के गैर-पारंपरिक स्रोतों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, ज्वारीय ऊर्जा, शेल गैस, कोल् बेड मीथेन, भू-तापीय ऊर्जा इत्यादि हैं ।,

    भारतीय भौतिक अवस्थिति  गैर परंपरागत संसाधनों के प्रति अनुकूल होने के बाद भी  कुल ऊर्जा उत्पादन में  गैर परंपरागत स्रोतों का हिस्सा कम है। प्रमुख कारण हैं:

    1. उन्नत तकनीक की कमी जो ऊर्जा स्रोत का दोहन करने के लिए आवश्यक है।
    2. उच्च प्रारंभिक पूंजी लागत के साथ परियोजना की वित्तीय व्यवहारिकता पर संदेह ।

3.बिजली उत्पादन की लागत पारंपरिक स्रोत से अधिक है।
4. मुख्य ग्रिड के साथ गैर-पारंपरिक संसाधनों से उत्पादित बिजली को सिंक्रनाइज़ करने में कठिनाई।
5. भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में देरी ने भी बाधाएं पैदा की हैं क्योंकि इनमें से कुछ गैर-पारंपरिक स्रोतों जैसे सौर, पवन ऊर्जा आदि के लिए विशाल क्षेत्र की आवश्यकता होती है।

हालांकि, हाल ही में सरकार ने पर्यावरणीय चिंताओं और भारत की प्रतिबद्धता के कारण इन संसाधनों का अधिक उपयोग करने की इच्छा दिखाई है। इसके उदाहरण है:

    • पेरिस जलवायु समझौते के अनुसार भारत के INDC लक्ष्य | भारत नवीकरणीय संसाधनों के माध्यम से 175 गीगावाट ऊर्जा उत्पादन हेतु वचनबद्ध  है।
    • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना में भारत की अग्रणी भूमिका है।
    • भारत एवं अन्य देश जर्मनी की मदद से हरित ऊर्जा गलियारा स्थापित करने जा रहे हैं |