UPPCS Mains- 2018 answer writing practice || UPPCS मुख्य परीक्षा – 2018 उत्तर लेखन अभ्यास #29

UPPCS MAINS- 2018 ANSWER WRITING PRACTICE

Along with micro-financing institutions, the self-help groups (SHG’s) are emerging as institutions of social capital. Discuss? Do you think SHGs have moved beyond credit and are doing commendable work in other areas as well? Substantiate. (200 words)
सूक्ष्म वित्त पोषण संस्थानों के साथ, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सामाजिक पूंजी के संस्थानों के रूप में उभर रहे हैं। चर्चा करें? क्या आपको लगता है कि  स्वयं सहायता समूह साख से आगे  बढ़कर अन्य क्षेत्रों में भी सराहनीय काम कर रहे हैंपुष्टि करें। (200 शब्द)

A self-help group (SHG) is a voluntary association of men or women in similar economic conditions. The members of the group make small savings for duration of time until they have enough capital in the group to start their own lending process. These funds can then be utilised for lending purposes (to members or other people). Under the SHG-Bank linkage programme, many SHGs have become institutions of micro-credit.

SHGs and social capital:
Apart from the economic function, the SHGs provide a forum in which people can meet on a regular basis and discuss  various issues or concerns that the members face in their day-to-day life which acts as the basic source of social capital generation.

  • By providing employment opportunities and financial and social security SHGs have helped improve the status of women. The formation of SHGs and promoting credit activities helped in empowering the women, creating awareness regarding their rights and responsibilities.
  • SHGs have become a vehicle to lift people from below poverty line, empower women generate awareness about welfare and developmental schemes of government, monitor its implementation etc. to name a few.
  • SHGs have helped the members to develop their leadership qualities which are useful not only within the group but also in their interaction and participation in other institutions.

Examples:

  • Kudumbashree in Kerala has helped in providing skill training and poverty eradication of women.
  • They act as pressure groups for policy framing as seen in legislation- making for prohibition in Bihar which was the result of pressure from several women SHGs in Bihar.
  • Haryana govt used SHGs for increasing sex ratio and making “beti bachao, beti padhao” a success.
  • SHGs like SEWA, Lizzat papad promotes entreprenurial culture among women.

Conclusion:
Given the multi-faceted role played by SHG in inclusive development, Government needs to further support SHG by handholding nascent SHGs and provide them training in areas of management, finance and accounting.


एक स्व-सहायता समूह (एसएचजी) समान आर्थिक स्थितियों  वाले पुरुषों या महिलाओं का एक  सहकारी समूह है। समूह के सदस्य  अल्प अवधि के लिए छोटी बचत करते हैं । इस धन का उपयोग   साख उपलब्ध कराने (सदस्यों या अन्य लोगों के लिए) के लिए किया जा सकता है। एसएचजी-बैंक लिंकेज कार्यक्रम के तहत, कई एसएचजी सूक्ष्म वित्तपोषण संस्थान बन गए हैं।

 

एसएचजी और सामाजिक पूंजी:
आर्थिक कार्य के अलावा, एसएचजी एक मंच प्रदान करते हैं जिसमें लोग नियमित आधार पर मिल सकते हैं और सदस्यों द्वारा दैनिक जीवन के विभिन्न मुद्दों या चिंताओं पर चर्चा की जा सकती है  और इस प्रकार सामाजिक पूंजी  का निर्माण भी होता है।

  • रोजगार के अवसर और वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करके एसएचजी ने महिलाओं की स्थिति में सुधार करने में मदद की है। एसएचजी का गठन और साख(क्रेडिट) गतिविधियों को बढ़ावा देने से महिलाओं को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में जागरूकता पैदा करने में मदद मिली जिससे उनका सशक्तिकरण हुआ है।
  • एसएचजी गरीबी रेखा से नीचे लोगों का जीवन स्तर सुधारने, महिलाओं के सशक्तिकरण,  एवं  सरकार की  विकास योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने  का और उनके उचित क्रियान्वयन  सुनिश्चित करने का एक उपकरण बन गए हैं।
  • एसएचजी ने सदस्यों को उनके नेतृत्व के गुण विकसित करने में मदद की है जो न केवल समूह के भीतर उपयोगी हैं बल्कि अन्य संस्थानों में भी उनकी भागीदारी में उपयोगी हैं।

उदाहरण:

  • केरल में कदंबश्री ने महिलाओं के कौशल प्रशिक्षण और गरीबी उन्मूलन प्रदान करने में मदद की है।
  • ये बिहार में कई महिला एसएचजी से दबाव का नतीजा था, जो बिहार में मद्यनिषेध के लिए कानून बना | अतः वे नीति निर्माण के लिए दबाव समूहों के रूप में कार्य करते  है।
  • हरियाणा सरकार ने लिंग अनुपात बढ़ाने और “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” को सफल बनाने के लिए एसएचजी का इस्तेमाल किया
  • सेवा, लिज़्ज़त पापड़ जैसे एसएचजी महिलाओं के बीच उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं ।

निष्कर्ष:
समावेशी विकास में एसएचजी द्वारा निभाई गई बहुमुखी भूमिका को देखते हुए, सरकार को नवजात एसएचजी को प्रोत्साहन देने और उन्हें प्रबंधन, वित्त और लेखा के क्षेत्र में प्रशिक्षण देने की जरूरत है।