UPPCS Mains- 2018 answer writing practice || UPPCS मुख्य परीक्षा – 2018 उत्तर लेखन अभ्यास #30

UPPCS MAINS- 2018 ANSWER WRITING PRACTICE

The Government of India Act, 1935 is a watershed in India’s constitutional history. Elucidate. (200 words)
भारत सरकार अधिनियम, 1935 भारत के संवैधानिक इतिहास में  महत्त्वूर्ण घटना है। स्पष्ट करें (200 शब्द)

The Act derived material from four key sources viz. Report of the Simon Commission, discussions at the Third Round Table Conference, the White Paper of 1933 and the reports of the Joint select committees.

The Act had far reaching repercussions:

  • One of the reason was for which it was important was that some provincial autonomy was granted. This was the first time that this had been allowed and was seen as an important step forward. Ministers in the provinces could have control over all departments, except when governors choose to intervene in cases of public order or to veto a bill they disliked. This was a draw back since it meant that the real power was in the hand of the governors.
  • Another reason was that it granted more voting rights to the people of India i-e 25% of the population of India was now having the right to vote. The act also recommended a federal form of govt. for India which enables the princes to participate in the political affairs of India.
  • The final and the most important reason was that although it suited no-one, the act was an important point in the move towards independence. It proved the basis for the negotiations which finally resulted in the British leaving India. Parliamentary systems had been set up in which the Indians people were to gain increasing representation. It became basis of Constitution of India in Independent India.

    यह अधिनियम चार प्रमुख स्रोतों से निगमित था: साइमन कमीशन की रिपोर्ट, तीसरे गोलमेज सम्मलेन में हुई चर्चाएं , 1933 का श्वेत पत्र और संयुक्त चयन समितियों की रिपोर्ट।

    इस अधिनियम के दूरगामी परिणाम हुए :

    • एक महत्वपूर्ण कारण यह था कि इसमें कुछ प्रांतीय स्वायत्तता दी गई थी। यह पहली बार था जब इसकी अनुमति दी गई थी और इसे एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा गया था। प्रांतों के मंत्रियों को सभी विभागों पर नियंत्रण था, सिवाय इसके कि जब राज्यपाल  कानून व्यवस्था के मामलों में हस्तक्षेप करना चुनते  या किसी विधेयक को नापसंद करते। यह एक कमी भी थी क्यूंकि इसका अर्थ था कि असली शक्ति राज्यपालों के हाथ में थी।
    • एक और कारण यह था कि इसने भारत में अधिक लोगों को मतदान अधिकार दिए; अब भारत की 25% आबादी को वोट देने का अधिकार था । इस अधिनियम ने सरकार के संघीय रूप की भी सिफारिश की और भारत की रियासतों को भारत के राजनीतिक मामलों में भाग लेने में सक्षम बनाया ।
    • अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कारण यह था कि हालांकि यह किसी के अनुकूल नहीं था , फिर भी यह स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। यह उस बातचीत के लिए आधार साबित हुआ जिसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों ने अंततः भारत छोड़ दिया। इसमें संसदीय प्रणाली स्थापित की गई थी । स्वतंत्र भारत में यह भारत का आधार  बना |