UPPCS Mains- Answer writing practice- Sugarcane industry in India #41

UPPCS Mains- Answer writing practice- Sugarcane industry in India

Discuss the distribution of sugarcane industry in India. What are the challenges faced by the industry? (200 words)

भारत में गन्ना उद्योग के वितरण पर चर्चा करें। उद्योग के सामने क्या चुनौतियाँ हैं? (200 शब्द)


Model Answer – Sugarcane industry in India

India is the world’s largest producer of sugarcane and cane sugar and contributes about 8% of the total sugar production in the world.

Distribution of Sugar Industry Sugar industry in India is based on sugarcane, which are a heavy, low value, weight losing and perishable raw material. Sugarcane cannot be stored for long as the loss of sucrose content is inevitable. Besides, it cannot be transported over long distances because any increase in transportation cost would raise the cost of production and the sugarcane may dry up on the way. Hence sugar mills are located in the cane producing areas. Also, it is a seasonal industry because of
seasonality of raw materials.
Based on these factors, sugar industry has two major areas of concentration. One comprises Uttar Pradesh, Bihar, Haryana and Punjab in the north and the other that of Maharashtra, Karnataka, Tamil
Nadu and Andhra Pradesh in the south.

Problems facing the sugar industry in India
Low yield per hectare of sugarcane in India in comparison to other countries.
Short crushing season – It makes the industry seasonal creating financial problems for the sector.
Fluctuating production trends – leads to years of severe shortfall, followed by bumper harvest.
High cost of production due to high cost of sugarcane, inefficient obsolete technology, uneconomic
process of production and heavy excise duty result in high cost of manufacturing.
Small and uneconomic size of mills with obsolete machinery.
Distortion in cropping pattern – Sugarcane production is water-intensive and is located in waterscare areas like Maharashtra

.Policy issues– state governments often announce higher Fair and Remunerative Prices (FRP) for the season, often ignoring market dynamics.


उत्तर – भारत गन्ने और चीनी का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक है और विश्व के कुल चीनी उत्पादन में लगभग 8% का योगदान देता है।

भारत में चीनी उद्योग का वितरण :

चीनी उद्योग गन्ने पर आधारित है, जो एक भारी, कम मूल्य का, भार-ह्रासी  और कशीघ्र-नाशवान कच्चा माल है। गन्ने को लंबे समय तक संग्रहीत नहीं किया जा सकता है क्योंकि ऐसे में सुक्रोज का नष्ट होना अपरिहार्य है। इसके अलावा, इसे लंबी दूरी पर नहीं ले जाया जा सकता है क्योंकि परिवहन लागत में वृद्धि से उत्पादन लागत में वृद्धि होगी और रास्ते में गन्ना सूख सकता है। अतः चीनी मिलें गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में स्थित हैं। इसके अलावा, यह एक मौसमी उद्योग है क्योंकि कच्चे माल की उपलब्धता मौसमी होती है।

इन कारकों के आधार पर, चीनी उद्योग दो प्रमुख क्षेत्रों में अवस्थित है। उत्तर में उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और  पंजाब और दूसरी ओर दक्षिण में महाराष्ट्र, कर्नाटक,

तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश।

भारत में चीनी उद्योग के सामने समस्याएँ

  • अन्य देशों की तुलना में भारत में प्रति हेक्टेयर गन्ने की कम उपज।
  • पेराई का छोटा मौसम – यह मौसमी उद्योग है और इसलिए वित्तीय समस्याएँ हैं ।
  • उत्पादन में उतार-चढ़ाव – कई वर्षों में उत्पादन में बहुत कमी होती है, और इसके बाद बम्पर फसल होती है।
  • गन्ने की उच्च लागत, अकुशल पुरानी प्रौद्योगिकी, उच्च उत्पादन शुल्क के कारण निर्माण की उच्च लागत ।
  • मिलों का छोटा आकार।
  • फसल के पैटर्न में विकृति – गन्ने का उत्पादन जलनिर्भर है और महाराष्ट्र जैसे अर्धशुष्क क्षेत्र में स्थित है|

.नीतिगत मुद्दे- राज्य सरकारें अक्सर उच्च फेयर एंड रिम्यूनेरेटिव प्राइस (FRP) की घोषणा करती हैं, जो कि बाजार सिद्धांतों के विरुद्ध है ।

sugarcane industry in India


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Hemant Bhatt