जीन एडिटिंग से संबंधित नैतिक चिंताएँ  #51

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प्रश्न :क्रिस्पर-कैस 9 क्या है? जीन एडिटिंग के किन-किन क्षेत्रो मे इसका अनुप्रयोग संभव है| इसके अनुप्रयोग मे कौन सी नैतिक चिंताए जन्म लेती है? 

हाल ही में एक चीनी शोधकर्त्ता ने दावा किया कि उसने इस महीने पैदा हुई दुनिया के पहले जेनेटिकली एडिटेड बच्चों (जुड़वाँ लड़कियों) को उत्पन्न करने में सफलता हासिल की। शोधकर्त्ता के अनुसार, उसने जुड़वाँ बच्चों के DNA को जीवन के महत्त्वपूर्ण लक्षणों को पुनर्संपादित करने में सक्षम, एक शक्तिशाली नए उपकरण के द्वारा परिवर्तित कर दिया है। हालाँकि, उसका यह दावा अभी भी सत्यापित नहीं है और इस दावे पर तमाम तरह से अनैतिक ठहराया जा रहा है। दरअसल, जीन पूल की विविधता के साथ किसी भी प्रकार के परिवर्तन के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।

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तापमान एक अदृश्य जलवायु जोखिम (invisible climate risk) # 44

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प्रश्न : विश्व में जलवायु में बढ़ते तापमान से किस प्रकार की समस्या उत्पन्न होने की संभावनाएं ज्यादा है? इंडिया कुलिंग एक्शन प्लान क्या है एवं इसके क्या लक्ष्य है ? बढ़ते तापमान पर नियंत्रण करने के उपाय सुझाए |

जब हम जलवायु परिवर्तन की बात करते हैं, तो अक्सर इसमें पिघलने वाली बर्फ की चादरों और अत्यधिक सूखे की अवधियों को ही शामिल करते हैं। हालाँकि, इसका एक और पक्ष बढ़ता तापमान भी है। यह एक अदृश्य जलवायु जोखिम है जिससे विभिन्न समुदाय अभी तक अनजान हैं। दरअसल, बढ़ते तापमान की धीमी और क्रमिक प्रवृत्ति लोगों के जीवन, आजीविका और उत्पादकता को सीधे प्रभावित करती है। उल्लेखनीय है कि ज्यादातर संवेदशील लोग खुद को गर्मी से कैसे बचा सकते हैं, इसके बारे में उन्हें या तो सीमित जानकारी है या कोई जानकारी नहीं है। यहाँ तक कि राष्ट्रीय स्तर पर भारत कूलिंग एक्शन प्लान के माध्यम से राष्ट्रीय शीतलन रणनीति को लागू करने के सरकार के प्रयास को भी अपर्याप्त माना जा रहा है।

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रिक्त पद बनाम लंबित मामले (A Crippling Shortage) # 43

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प्रश्न:न्यायालय में जज की नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है ? हाल ही में न्यायालय ने पहले से लंबित पड़े मुकदमों के संबंध में घोर चिंता व्यक्त की है | उन संभावित कारणों की पहचान करें जिनके कारण न्यायालय की क्षमता प्रभावित हो रही है एवं उसके समाधान को भी खोजने का प्रयास करें |

सामान्य अध्ययन-II

संदर्भ

हाल ही के नवीनतम आँकड़ों के मुताबिक, देश में लगभग 3.3 करोड़ लंबित मामलों का बैकलॉग है जिसमें से लगभग 2.84 करोड़ मामले अधीनस्थ अदालतों में लंबित हैं। न्यायपालिका में मानव संसाधन की कमी लंबित मामलों की लापरवाही के लिये उत्तरदायी है। इन मामलों का स्वतः संज्ञान लेते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने देश की निचली अदालतों में रिक्तियों को भरने में की जाने वाली देरी के संबंध में राज्य सरकारों और विभिन्न उच्च न्यायालयों के प्रशासन की आलोचना की है।

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न्यायिक सक्रियता की ओर बढ़ते कदम  # 42

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प्रश्न : वर्तमान में न्यायपालिका द्वारा  सरकार के कार्य में हस्तक्षेप कर दिए गए अनेक निर्णयों को देने की प्रथा मे बारंबारता आ रही है|कुछ विचारक इसे न्यायिक सक्रियता  कहते हैं| इस संदर्भ में न्यायिक सक्रियता को परिभाषित करते हुए इस का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें |
    सामान्य अध्ययन – II

संदर्भ

हाल के कई निर्णयों से ऐसा माना जा रहा है कि सर्वोच्च न्यायालय कानून निर्माण करने में अति सक्रिय भूमिका निभा रहा है। न तो राज्य के तीनों अंगों के बीच शक्तियों का स्पष्ट पृथक्करण है और न ही कानून संरक्षित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राम जवाया बनाम पंजाब राज्य (1955) के मामले में, अदालत ने कहा था कि “हमारा संविधान राज्य के एक अंग या हिस्से की धारणा पर विचार नहीं करता है, जो अनिवार्य रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं।” इसका तात्पर्य है कि संविधान में राज्य के तीन अंगों (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) के बीच शक्तियों का स्पष्ट पृथक्करण होना चाहिये और एक अंग को दूसरे के क्षेत्र का अतिक्रमण नहीं करना चाहिये। यदि ऐसा होता है, तो संविधान के नाजुक संतुलन को हानि पहुँचेगी और अराजकता फैलेगी।

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उचित आहार का निर्धारण (Setting a proper diet plan) #39

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प्रश्न :कुपोषण क्या है? भारत में इसकी स्थिति को बताएं | भारतीय समाज के सामने यह किस प्रकार एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में सामने आता है और इस पर नियंत्रण कैसे संभव हो सकता है?

संदर्भ

पूरे विश्व में तेज़ी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने का तमगा लगने के बावजूद भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2018 के 119 देशों की सूची में 103वें पायदान पर है। इस पायदान पर होना भारत के लिये अत्यंत गंभीरता का विषय है। हाल ही में भारत की राजधानी, दिल्ली में दीर्घकालिक कुपोषण तथा भूख की वज़ह से आश्चर्यजनक ढंग से तीन बच्चियों की मौत हो गई थी।

क्या यह विडंबना नहीं है कि ऐसी घटना उस जगह पर हुई जहाँ प्रति व्यक्ति आय काफी उच्च है। भारत में कुपोषण की भयावह स्थिति वैश्विक पटल पर दयनीय होने के साथ-साथ सभी राज्यों में भी असमान रूप से भिन्न-भिन्न है।

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भारत में सेवा क्रांति के मायने (India and the promise of service revolution) #38

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प्रश्न : भारत के पहली औद्योगिक क्रांति से चौथी औद्योगिक क्रांति  तक  के सफर को तय किया है|ऐसे मे फिलहाल चौथी औद्योगिक क्रांति मे उत्पन्न कौन सी चुनौतियाँ है|और इससे कैसे निपटा जा सकता है? 

सामान्य अध्ययन-III

संदर्भ

भारत चौथी औद्योगिक क्रांति का सामना कर रहा है जो उद्यमियों, उपभोक्ताओं, युवाओं और वृद्ध लोगों को समान रूप से प्रभावित करेगा। पहली औद्योगिक क्रांति पानी और भाप की शक्ति के कारण हुई, जिसने मानव श्रम को यांत्रिकी निर्माण में परिवर्तित किया वहीं, दूसरी औद्योगिक क्रांति विद्युत शक्ति के कारण हुई जिसकी  वज़ह बड़े स्तर पर उत्पादन संभव हो सका तथा तीसरी औद्यगिक क्रांति ने इलेक्ट्रॉनिक  और सूचना प्रौद्योगिकी के प्रयोग द्वारा स्वचालित निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। चौथी औद्योगिक क्रांति वर्तमान में जारी है और इसमें ऑटोमेशन तथा निर्माण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आँकड़ों का आदान-प्रदान किया जा रहा है। डिजिटल संचार में पाँच दशकों की बढ़ती क्षमताओं और गिरती लागतों के परिणामस्वरूप वैश्विक सेवा क्रांति हुई यह मौजूदा उद्योगों, श्रम बाज़ारों को पुनः बदल रहा है और इस तरह से हम एक-दूसरे से संबंधित हैं तथा इससे प्रभवित हो रहे हैं। सेवा क्षेत्र अब विनिर्माण क्षेत्र पर हावी है और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 70% से अधिक का योगदान देता है।

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तालिबान पर भारत की अवस्थिति (The shift in India position on Taliban) #37

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प्रश्न : मॉस्को फॉर्मेट क्या है ? भारत सरकार की तालिबान के साथ वर्तमान संबंध  का अध्ययन करके बताए  की तालिबान किस प्रकार भारत और अफगानिस्तान के संबंध को प्रभावित कर रहा है| 

संदर्भ

हाल ही में भारत ने ‘मॉस्को फॉर्मेट’ की बहुपक्षीय बैठक में ‘गैर-आधिकारिक’ प्रतिभागियों के रूप में दो पूर्व राजनयिकों को भेजा था। गौरतलब है कि इस बैठक में तालिबानी प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया था। भारतीय राजनयिकों में अफगानिस्तान के पूर्व राजदूत अमर सिन्हा और पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त टी. सी. ए. राघवन शामिल थे। वर्तमान में सिन्हा और राघवन विदेश मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित अलग-अलग थिंक टैंक से संबद्ध हैं।

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क्वाड चतुष्कोणीय समूह(Four corners: on the Quad’s agenda) #36

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प्रश्न : क्वाड समूह क्या है? इसके संभावित लाभ को बताए| वर्तमान मे क्वाड समूह मे निहित  समस्या को उजागर करते हुए यह समझाये की कैसे भविष्य मे इसका  समाधान संभव हो सकेगा?

सामान्य अध्ययन-II

संदर्भ

हाल ही में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के क्वाड समूह’ के अधिकारियों ने सिंगापुर में मुलाकात की। क्वाड को ‘ स्वतंत्र, खुले और समृद्ध ’ भारत-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने और समर्थन करने के लिये साझा उद्देश्य के साथ चार लोकतंत्रों के रूप में पहचाना जाता है। इस दौरान चार देशों के इस समूह द्वारा उन बुनियादी ढाँचे की परियोजनाओं पर चर्चा करने की उम्मीद है, जिन पर वे काम कर रहे हैं और मानवतावादी आपदा प्रतिक्रिया तंत्र का निर्माण कर रहे हैं।

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बाढ़-प्रबंधन के रास्ते #23

 

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मानसून बीतने के साथ ही, जगह-जगह आई भीषण बाढ़ के कहर ने आपदा नियंत्रण से जुड़े अनेक प्रश्न खड़े कर दिए हैं। बाढ़ हर वर्ष आती है। परन्तु ऐसा लगता है कि असम, बिहार और तमिलनाडु में आई बाढ़ों से सरकार ने कोई सबक नहीं लिया है। नतीजतन केरल में भी बाढ़ ने कहर ढाया। अभी भी सरकार का मानना है कि ऐसी आपदा को मानवीय प्रयास नियंत्रित नहीं कर सकते थे। परन्तु तकनीकी तौर पर वास्तविकता कुछ और ही कहती है। पढ़ना जारी रखें “बाढ़-प्रबंधन के रास्ते #23”

मानव विकास सूचकांक (एच डी आई) में भारत की वास्तविक स्थिति #22

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  • गत वर्ष संयुक्त राष्ट्र के मानव विकास सूचकांक में भारत की रैंकिंग एक स्थान से ऊपर उठकर 130 पर पहुँच गई। इसके साथ ही गौर करने वाली बात यह है कि 1990 से लेकर अब तक भारत ने मानव विकास पैमाने पर काफी बेहतर किया है। 1990 में जहाँ भारत का मूल्यांकन 0.43 पर किया गया था, वहीं 2017 में यह लगभग 50 प्रतिशत बढ़कर 0.63 पर आ गया है।

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